Thursday, October 20, 2011

एक दीवार

एक घर की दीवार अभी तोड़ी ही थी
खुली हवा में सांस लेने के लिए
के ब्याह दी गयी
एक नए घर की चाहर दीवारी में
कैद होने के लिए
चाहर दीवारी भी ऐसी कि
बस फड़फाड़ाने की इच्छा भर से सनक जाती
और किवाड़ों की चों चों बताने लगतीं
रिवाजों के किस्से कहानी और दर ओ दीवार के रंग

एक पिता का भय अभी निकला भी नहीं था के
सामने खडी कर दी गयी
पिताओं की कतार
यहाँ के पिता का अर्थ था
मर्यादा जो उसने मंडप में ही कह दिया था
यहाँ के पिता का अर्थ था
एक अनकही , एक बेडी और लज्जा
सच ये एक एक सुरंग थी
जो अँधेरी भी थी और अनजान भी
और एक अजीब पहेली सी

दो पिताओं के बीच
एक सौदा था यह घर
सौदा भी ऐसा
जहाँ सब मेरा ही गया
तन भी , मन भी और धन भी
सौदा भी ऐसा के जहाँ
मेरे पिता की पगड़ी निढाल है
सौदा भी ऐसा कि
पिता की गाढी कमाई और सबकी जूती
बराबर
और मेरी अस्मिता चाकर

एक घर के रिवाजों के फ्रेम को अभी चटकाया ही था
के दूसरी फ्रेम में मढ़ दी गयी
एक तस्वीर सी
जो बस मुस्कुराती भर थी
क्योंकि यहाँ रोने पर प्रश्न
और बोलने पर पहरे थे
यह एक घर था
बेदर्द
जिसे खोजा भी मेरे पिता ने ही था
इसमे मेरे रहने का
आजीवन किराया भर कर
घर सुसज्जित था इसलिए किराया भी अधिक था
मर्यादा के नाम पर
मुझे अन्दर से मर जाने की दुहाई भी दी थी
मैं एक जो सपनो में जीती थी
नए घर के
ये सब समझने के बाद
अपनी अनंत इच्छाओं पर गर्म पानी ड़ाल
एक समझौता किया था
अनुराग का ?

पर
अब रह रह कर समझौता तोड़ने का
मन करता है
रह रह कर फिर दीवारों को तोड़ने का
मन करता है
रह रह कर उड़ने को मन करता है
अपनी उड़ान
इसलिए मैं जंग करती हूँ
और तोड़ रही हूँ
फिर एक दीवार
......................................................... अलका

2 comments:

  1. alkaa ji.... alka ji... alka ji... natmastak....

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  2. मन उड़े अपनी उड़ान...!

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