Saturday, September 3, 2011

बैरगिया नाला और उसका रहस्य

बैरागिया नाला की कहानी बेहद रोचक है. यह बात उस समय की है जब यात्रा बहुत कठिन हुआ करती थी. लोग़ अक्सर पैदल या बैल गाड़ी से यात्रा करते थे. तब बैलगाड़ी भी वैभव का हिस्सा होती थी आम लोग़ खाने पीने का सामान लेकर पैदल ही यात्रा करते थे. इलाहाबाद और बनारस दो ऐसी जगहें थी जहाँ तीर्थ यात्री बहुत आते थे. सामान्य यात्रायें भी यहाँ बहुत होती थी. इन दोनों नगरों के बीच एक नाला पड़ता था जिसे बैरागिया नाला कहते थे. इस नाले की खासियत यह थी के इसे पार किये बिना इलाहाबाद के लोग़ बनारस नहीं जा सकते थे नहीं बनारस के लोग़ इलाहाबाद जा सकते थे. इसी नाले के पास धुनी राम के ३ दोस्त रहने लगे. ये तीनो दोस्त बैरागी के भेष में रहते इसलिए लोग़ उन्हें बैरागी कहते और नाले को बैरागिया नाला कहके पुकारते.



उन्हीं दिनों बैरागिया नाला के पास से ये ख़बरें आने लगीं के वहां यात्रियों को लूट लिया जा रहा है. कौन लूट रहा है ये लम्बे समय तक राज रहा. लोग़ एक तरफ तीर्थ यात्रा का मोह नहीं छोर पाते और दूसरी तरफ अपने लुटने को भगवन भरोसे डालकर यात्रायें करते रहते. एक दिन यात्रियों के एक समूह ने कुछ गौर किया. चूँकि उस समूह ने उस दिन बहुत सावधानी नहीं बरती थी इसलिए उसने यात्रा करने वाले दूसरे समूह से इसपर चर्चा की. धीरे धीरे यह बात आग की तरह फ़ैल गयी औ लोगों ने तय किया कि बैरागिया नाला की तरफ से जाने वाले लोगों को इस धटना पर ध्यान देने को कहा जायेगा. अगले समूह ने ध्यान दिया औ पाया कि नाले पे रहने वाले ३ साधू ही लोगों को लूटते हैं. लोगों ने उनको सबके सामने लाने की योजना बनाई और चल पड़े नाले की ओर. यात्रिओं ने तीन समूह बनाये ऐसा इसलिए क्योंकि नाले के संरचना कुछ इस तरह की थी के एक बार में कुछ खास संख्या में ही लोग़ जा सकते थे. जैसे ही नाले के अन्दर पहला समूह दाखिल हुआ तीनो अपनी आदत के मुताबिक लोगों को लूटने लगे. पहले समूह ने अपनी योज़ना के अनुसार बाहर के समूह को आवाज़ दी और बाहर से बारी बारी से सारे यात्री अन्दर आ गए और तीनो की खूब पिटाई की और बैरागिया नाले का आतंक ख़तम हुआ.



इस पूरे घटना क्रम में उन तीन चोरों द्वारा यात्रियों को लूटने की तकनीक इस घटना का सबसे रोचक हिस्सा है. तीनो चोर्रों ने उस नाले पर चोरी की एक रणनिति बनाई थी. एक चोर 'दामोदर' चिल्लाता जब यात्री उसे आते हुए दिख जाता.दामोदर का अर्थ था जिसके उदर में दाम हो - मतलब यात्री मालदार है. दूसरा चोर चिल्लाता 'नारायण' मतलब यात्री नाले के भीतर पहुँच गया है. नारयन क अर्थ था यात्री नारी मे आ चुक है. यनि नारायन . तब तीसरा आवाज़ देता बासदेव मतलब अब मारों (बासदेव का मतलब था चोरों के लिए के अब बांस से मारो). लोगों ने जब चोरों के ही तरीके से उन चोरों को मारा तब ये कहावत चल पड़ी -



बैरागिया नाला जुलुम जोर

नव पथिक नचावत तीन चोर

जब एक एक पर तीन तीन

तब तबला बाजे धीन धीन



(ये घटना मुझे मेरे पापा ने सुनायी थी और मैं आप सब से इसे शेयर क़र रही हूँ )







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